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क्या मुमकिन है ?

Posted On: 21 Jul, 2014 Others,न्यूज़ बर्थ में

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जहां शराब हो वहाँ बुरी नियत, गन्दगी , बेहयाई और गन्दी बात न हो
जहां नाजायज़ दौलत हो वहाँ डर और झूट न हो
जहां झूठ हो वहां टकराव न हो
जहाँ टकराव औए बेईमानी हो वहां नफरत न हो
जहाँ नफरत हो वहां अमन और चैन हो
जहां सेक्सी डांस हो वहां किसी धर्म का ध्यान हो
जहाँ धर्म न हो वहां अच्छे कर्म हो
जहाँ अच्छे कर्म न हों वहां दुष्कर्म न हो
जहाँ दुष्कर्म हों वहां किसी को शर्म हो
जहां आग लगी हो वहां लकड़ी न जले
जहाँ हराम को हराम न समझा जाए वहां पाप न हो
और अगर घर का पहरेदार न हो तो चोरी न हो
अगर गोरा बदन बिना परदे के धुप में रहे तो काला न हो
हर चीज़ पर पर्दा न हो तो उसका भला हो
जैसे
दौलत , राज़ , अक़्ल , दिल , सोच , इरादा , हवा , और हर वो चीज़ जो क़ीमती और अनमोल होता है उसे बिना परदे के रखा जाए और वो बच जाय ये मुमकिन नहीं उसी तरह आज मुझे कहने में ज़रा भी परवाह नहीं के हमारे समाज में अगर आज भी एक बहन अपने पुरे तन को पर्दा में रख कर जिस रस्ते से गुज़रती है उसकी पेशानी पर शिकन नज़र नहीं आता और हर बुरी नियत वाला पहले हज़ार बार सोचता है के ये किस सोच की और किस संस्कार की बेटी है इस से टकराना मुनासिब नहीं इसकी निगाहें अपनी मंज़िल पर हैं और इसके ख़याल अपनी इज़्ज़त पर है इतिहास गवाह है के रानी लक्ष्मी बाई हों या झाँसी की रानी सबने एक से एक कारनामे अपने आपको पूरी भारतीय शभ्यता और लाज की चादर ओढ़ कर ही अंजाम दिया है .
इस लिए मैं अपनी बहनो से आग्रह करूँगा के सबसे पहले अपने आप को बदलें अपने पूर्वजों के भाव और संस्कारों को अपनाएं फिर जहाँ मर्ज़ी जाएँ आपके तरफ निगाह उठाने वाला पहले हज़ार बार आपके बारे में सोचने पर मजबूर होगा क्यूंकि आपके हौसले और तेवर बदले हुए होंगे आपके अंदाज़ निराले और आक्रमण होंगे आपकी एक निगाह किसी मनचले के लिए किसी तलवार से कम नहीं होंगी. यही आपकी पहचान और आपकी तहज़ीब है इसी को मश्रिकी आँचल कहा गया है जिसका मिसाल किसी और देश में नहीं मिलता .
आज आपकी हिफाज़त और आपकी ताक़त और आपकी शान से बढ़ कर कोई मुद्दा नहीं आप सलामत है बा इज़्ज़त हैं तो देश की इज़्ज़त सलामत है .
कुछ लोग होंगे जिन्हे ये न तो पसंद आएगा न वो समझ पाएंगे के मैं क्या चाहता हूँ.



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santlal Karun के द्वारा
July 25, 2014

आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी, “दौलत , राज़ , अक़्ल , दिल , सोच , इरादा , हवा , और हर वो चीज़ जो क़ीमती और अनमोल होता है उसे बिना परदे के रखा जाए और वो बच जाय ये मुमकिन नहीं” — आप ने बहुत वाजिब और ज़रूरी बातों पर गौर फरमाया है | तकलीफ तो यह कि आज आधुनिकता के नशे में चूर अधिकतर देश, समाज और सरकारें इन ज़रूरी बातों का मज़ाक बनाते हैं | … इस महत्त्वपूर्ण आलेख के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

PKDUBEY के द्वारा
July 21, 2014

काश आदमी के दिमाग से हवश का पर्दा उठ जाये और उसे सर्वत्र फैला ज्ञान दृष्टिगोचर होने लगे क़ादरी जी | सादर सुन्दर आलेख |


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