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Imam Hussain Quadri


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क्या हम सोचते हैं ?

Posted On: 15 Feb, 2013  
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औरत

Posted On: 14 Feb, 2013  
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धर्म

Posted On: 9 Feb, 2013  
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मोहब्बत ?

Posted On: 8 Feb, 2013  
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अब हमें होशियार होना चाहिए

Posted On: 6 Feb, 2013  
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हमें क्या करना चाहिए ?

Posted On: 5 Feb, 2013  
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लीडर कैसा हो ?

Posted On: 4 Feb, 2013  
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हमारा प्यारा हिन्दुस्तान

Posted On: 11 Mar, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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बहुत रूहानियत से परिपूर्ण आलेख आदरणीय | इस बार मैं ट्रैन से जब बापस मुंबई आ रहा था ,तो मेरे पास की साइड बर्थ पर एक मुल्ला जी बैठे हुए थे,मुझे ज्यादा बातचीत करने की आदत नहीं ,पर वह अन्य लोगों से बातचीत कर रहे थे ,उन्होंने उससे कहा -मैंने बहुत से लोगों को सऊदी भेज दिया ,मुझे भी बहुत बार बाहर जाने का मौक़ा मिला ,पर मैं अपना भारत ,छोड़कर जाना नहीं चाहता |यह सबसे अच्छा है | मैंने सोचा यह तो बहुत महान सख्स है ,ये हिन्दुस्तान भी कह सकते थे ,पर इन्होने भारत ही कहा | मैंने उनसे परिचय पूछा ,वह मुंबई में ४ व्हीलर गाड़ियों के इंजन का ओवरहॉल करते हैं | इसलिए भारत मात्र एक जाती या धर्म का नहीं ,भारत में रहने वाले प्रत्येक उस जीव का है ,जो इससे अटूट प्यार करता है | बैसे मेरे बिचार से मोदी की लीडरशिप से सभी का भला होगा |

के द्वारा: pkdubey pkdubey

आदरणीय कादरी साहब साहब, आपने मेरी प्रतिक्रिया को किस अर्थ में लिया ..मैं न समझ सका... मैंने एक व्यंग्योक्ति कही थी. आज जो लोग अनाप शनाप बोले जा रहे हैं उनके खिलाफ... मैं कट्टरता के खिलाफ हूँ और आपसी सद्भाव बनाये रखने का हिमायती. आप शायद मेरे आलेख को पूरा नहीं पढ़ते हैं. अगर और कोई गलतफहमी हो तो अश्या जाहिर कीजियेगा. अकबर जी की कविता पर भी मैंने अपनी सहज प्रतिक्रिया ही दी थी. मैं समझता हूँ, आपको स्पष्ट हो गया होगा. ! हमसभी यहाँ/इस मंच पर एक दूसरे के आलेखों के माध्यम से ही जानते हैं और आलेख में अपना विचार ही व्यकत करते हैं. मोदी जी के विकास, सफाई और सद्भाव भरी बातों से सहमत हूँ, पर बीच बीच में लोग जो उल्टा-सीधा बयान देते हैं उनका मैं भी विरोध करता हूँ. ..सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

के द्वारा: DEEPTI SAXENA DEEPTI SAXENA

के द्वारा: deepak pande deepak pande

कादरी जी को नमस्कार .....बहुत दिनों बाद आपकी ब्लॉग जागरण जंक्शन में दिखी और मेरी उत्सुकता ने पड़ने पर मजबूर कर दिया ! आपने ब्लॉग लिखने के बाद चूँकि क्षमा मांग ली है इसीलिए कोई गलत बात या उत्तेजित न हो कर लिखने की कोशिश करूँगा ! आपको ध्यान दिलाना चाहता हूँ की मुसलमान को बदनाम करने के लिए लाखों आतंकवादी और पाकिस्तान जैसे देश काफी हैं ........तोगड़िया या गिरिराज सिंह की जरुरत नहीं है ! फिर मैं नहीं मानता की भारतीय मुसलमान कभी भी सांप्रदायिक हो सकता है .........गिरिराज और तोगड़िया की निंदा तो बनती है लेकिन सलमान खुर्शीद , अबु आजमी ,बुखारी , आजम खान जैसे गंदे लोगों पर भी विचार देते तो बहुत अच्छा होता .......बस यहीं से डीएनए टेस्ट शुरू होता है और आपका लेख पड़ कर लग रहा है की डीएनए टेस्ट के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते सच्चा मुसलमान दिखने की कोशिश में आपको मुस्लिम तुष्टिकरण नहीं दिखाई देगा .......आप चूँकि मोदी का कोई वक्तव्य सामने ला कर नहीं दिखा पाने की खीज गिरिराज और तोगड़िया पर निकल रहे हैं ! कभी फारुख अब्दुल्ला और आजम खान को भी आइना दिखाइए आपकी अति कृपा होगी अबु आजमी के बारे में गलती से मत लिखना या तो डीएनए टेस्ट रिपोर्ट भी सल्लग्न करना पड़ेगी ...............लेकिन मेरा मानना है मोदी ने करोंड़ो हिन्दुओं का दिल तोडा है...... हिन्दुओं की बात न करके .......कोई तो हिन्दू समाज का रक्षक भी चाहिए !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

मेरे बेटे सिर्फ किशोर बन गए हैं और यह एक पूरी नई गेंद का खेल ! मैं कुछ चिंताएं हैं ... क्यों वयस्क सामग्री स्वयं प्रसारण वेबसाइटों पर पदोन्नत किए जाने की अनुमति दी है. . एक अभिभावक के रूप में मैं पदोन्नति नग्नता के बिना संदेश और विज्ञापनों के रूप में है क्योंकि वेब सुरक्षा मुलायम पहनने संवर्धन रोका जा खिचड़ी भाषा भी साथ हैं. वे संदेश मिलता है जब वे उस पर अनुवर्ती कार्रवाई कौन जानता है जहाँ क्योंकि यह मुझे पागल और मुझे पागल बना रही है! . . मैं पिताजी baring खत्म हो नहीं करना चाहते , लेकिन मैं क्या करूँ ? यह स्प्रिंग ब्रेक है और वे मैं काम कर रहा हूँ , जबकि जंगली चलाने के लिए उम्मीद ! . . अब विशेष रूप से लड़कियों को व्यावहारिक रूप से भी जंगली चला गया है और दिन जब अनुचित मनोरंजन में बनने की ख्वाहिश . मैं हर किसी ने मुझे सलाह देने के लिए आते रहे नहीं किया गया है हैरान हूँ .. मैं दो किशोर बेटे हैं और मैं अपने मूल्यों अभ्यस्त सम्मानित किया कि चिंतित हूँ. हर किसी में दिया गया है? .

के द्वारा:

IMMAM SAHAB KYA YE SAHI HAI उत्तर प्रदेश के सहारनपुर संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान मसूद ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उनको टुकड़े-टुकड़े कर देने की धमकी दी। इस बीच, इमरान मसूद के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। बृहस्पतिवार को चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी से कांग्रेस में आए इमरान मसूद ने मोदी को भद्दी-भद्दी गालियां भी दीं। उन्होंने कहा कि मोदी हमारे राज्य को गुजरात बनाना चाहते हैं, लेकिन उसे पता नहीं है कि उसके राज्य में सिर्फ 4 फीसद मुस्लिम हैं, जबकि यहां 42 फीसद। वह मोदी को टुकड़े-टुकड़े कर काट देगा। इस भाषण का वीडियो कई समाचार चैनलों में भी प्रसारित किया गया है। इमरान के चाचा पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद थे। इमरान ने साथ ही कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए बच्चों को दबंग बनाने की वकालत करते हुए कहा कि अगर कानून तोड़ने पर कोई दरोगा उसे [बच्चों को] रोकने की कोशिश करें तो बच्चे भी दरोगा को हड़का सके।

के द्वारा:

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

मेरा एक भाई है जिसे एक प्रकार की मानसिक बीमारी है कि वो कोई भी काम पूरा नहीं करता बिलकुल वही स्थिती केजरीवाल की है .........इंजीनियर की नौकरी छोड़ी ......ये डिग्री किसी काम नहीं आयी .........कितना पैसा और किसी इंजीनियर का हक़ खा गया और अपने ४ साल बर्बाद किये सो अलग ..........बड़े सेवा भाव से मदर टेरेसा के पास गए ..........वहाँ भी कुछ ड्रामा कर के वापस आ गए ..........आई आर एस बनने में भी समय और पैसा बर्बाद किया .............वो भी छोड़ दिया ,,,,,. ..... अन्ना के साथ सामाजिक आंदोलन किया ............समाज और अन्ना को मूर्ख साबित कर के नेता बन गए ..........अब मुख्या मंत्री बन गए ..........जुम्मा जुम्मा चार दिन भी नहीं हुए प्रधानमंत्री बनने के सपने शुरू ............और इस आदमी की क्षमता को देखा जाये तो प्रधानमंत्री भी जून २०१४ में बन सकते हैं ..........लेकिन तब तक राष्ट्रपति का चुनाव आ जाएगा ..........हो सकता है वो भी २०१६ में राष्ट्रपति बन सकते हैं ..........लेकिन उसके बाद क्या ? ........अमेरिका का राष्ट्रपति बने बिना इस विश्व की कई समस्याओं समाधान मुश्किल है ...........आपकी स्पीड देख कर लगता है ज्यादा से ज्यादा ५ साल के भीतर आप अमेरिका का राष्ट्रपति बन सकते है .........लेकिन तब भी ये व्यक्ति संतुष्ट होगा ? मुझे संदेह है .....................!

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सबसे पहले पढ़ने और सहमति के लिए धन्यवाद . १. खतना इस्लाम में नहीं है कुछ लोग या जो देश करते हैं वो इस्लाम के लोग नहीं हैं अगर जो हैं वो जाने हमारे भारत के इस्लाम वालों में सुना है आपने कभी नहीं . २. तलाक तो सबसे बड़ी आज़ादी है के जिस से औरत बंधुआ और खरीदी हुयी गुलाम महसूस नहीं करती जब चाहे अगर वो खुश नहीं और उसे शांति सकूं नहीं मिलता तो जाना आसान है जिस परम्परा और इज़ज़त से आयी थी उसी इज़ज़त से जा सकती है जबके इस्लाम ने कानून तो बनाया मगर तलाक नहीं देने का अनुरोध भी किया है के एक तलाक़ से अर्श काँप जाता है यहाँ भी औरत को सम्मान दिया गया गुलाम नहीं समझा गया. ३ बहु विवाह ये इस्लाम में उतना नहीं है और अब तो बिलकुल नहीं है इसकी सही कोई रेवाज नहीं . ४. इस्लाम या कोई भी पढ़ने लिखने के लिए पूरी आज़ादी देता है और इस पर बहुत ही सख्ती से कहा गया है के तालीम हासिल करना मर्द औरत पर फ़र्ज़ है ये इस्लाम का सबक है इस लिए तालीम से इस्लाम मन नहीं करता बल्कि करने के सख्त हुकुम देता है फ़र्ज़ वो है जो नहीं करे तो गुनहगार होता है इस्लाम के मुताबिक. ५. हमने खास करके भारतीय सभ्यता कि बात कि थी के हमारी पहचान बिलकुल अलग है दूसरे देशों के निस्बत क्युंके यहाँ हर धर्म का अनोखा संगम है इस लिए हमारी सभ्यता भी अनोखी है . ६ . क्या बता सकती हैं के आग जले और धुआं नहीं निकले , ढोल बजे और आवाज़ नहीं आये , मेरा मक़सद यही था के जब हम बेपर्दा रहेंगे तो सबकी नज़रें मुझ तक खास कर पहुंचेगी ही जब हम फुल परदे में कहीं का भी सफ़र करें तो नज़रें परदे पर आ कर उक जायेगी परदे से मुराद बुरी नज़रों से बचना है बिलकुल घर में क़ैद करना मेरा मक़सद नहीं था . हर शिकारी शिकार के लिए उतावला था है रहेगा आप पर फ़र्ज़ है के शिकारी से कैसे सेफ रहें ऐसे दरिंदों को दरिंदा ही कहा जाएगा इंसान नहीं ऐसे दरिंदों का वधः के लिए हमे भी चौकन्ना और हुशियार रहने कि ज़रुरत है . फिर भी कुछ शिकायत हो तो ज़रूर पूछें मैं आपकी भावना को साझता और जानता हूँ और आग्रह करता हूँ के मेरी बहने अपने आपको बदल लें सबका भला होगा . धन्यवाद .

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

कादरी जी !अच्छा लिखा आपने अपने विचार रखे ,कई अर्थो में मै आपके विचारो से सहमत भी हूँ ,पर औरत कोई वस्तु नहीं जो उसे इतना सहेजने की जरूरत है,मर्दों को भी अपनी निगाह में पाकीजगी की जरुरत है !आपने यह तो लिखा कि औरत कुछ गलत करे तो कैसा लगता है ?पर आपने यह नहीं लिखा कि औरत के साथ घरेलू औरतों के साथ पर्दे की आड़ में क्या क्या अत्याचार होता है ,मैंने पढा है कि कुछ इस्लामिक देशो में औरतो का खतना जैसी बेहद तकलीफ देह क्रूरता होती है ,तलाक बहु विवाह ,पढने लिखने की आजदी से महरुम रखना कहाँ तक उचित है ?बहुत सहा है सदियों से औरतो ने !हाँ,,,यह सही है कि वे बेहू दे कपडे न पहने !पश्चिम की नक़ल में आजादी का मतलब गलत न निकाले !औरत आदमी की अलग अलग शारीरिक सामाजिक सीमाएँ है ,उसका अति क्रमण न करे ,कृपया मेरी बातो का अलग अर्थ न निकाले जो मै कहना चाहती हुँ,वही समझे !!बहुत धन्यवाद !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

आप नि सौ प्रतिशत सही कहा है-सच्चाई ये है के इस गन्दी हवा ( लिव इन रेलेशन ) से सिर्फ और सिर्फ हमारी बेटियों और बहनो का ही नुक्सान और बर्बादी होने कि गारेंटी पैदा हो रही है हमारे समाज में वो लोग जो आज कल विद्यार्थी के रूप से लेकर हर रूप का धारण करते हुए सबसे प्यारा और मनमोहक रूप जिस रूप पर हर जिव जंतु भी धोखा खा जाय यानि के संत फ़क़ीर साधू अंतर्यामी के रूपमें भी आज नंबर दो बने हुए घूम रहे हैं और उन्हें सिर्फ एक ही चीज़ कि तलाश है के किसे हवस का शिकार बनाया जाय और ऐसे शिकारियों के लिए ये हवा अच्छी साबित होगी.आप ने बहुत मेहनत की है और बहुत बेहतर लेख लिखा है.मुझे तो आश्चर्य हो रहा है कि नेता अभनेता सभी पागलों की तरह समलैंगिकता का समर्थन कर रहें हैं,जो प्रकृति के खिलाफ है और जिसका दुष्परिणाम एड्स जैसा भयंकर जानलेवा रोग है.समलैंगिकता की आड़ में छोटे मासूम बच्चो का कितना शोषण हो रहा है,यह किसी को नहीं दिखाई दे रहा है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

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के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी,आप ने मुझे सम्मान दिया,इसके लिए ह्रदय से धन्यवाद.आप को मै जानकारी देना चाहूगा कि इस प्रतियोगिता के लिए आप की ये प्रविष्टि अपूर्ण और अमान्य है.ये पहले ही प्रतियोगिता से बाहर कर दी जायेगी.आप दो काम कीजिये.सबसे पहले लिस्ट से मेरा नाम हटाकर अपना नाम लिखिए,मुझे बिलकुल भी बुरा नहीं लगेगा.मै आप के दिल में रहता हूँ,मेरे लिए यही काफी है.दूसरा ये कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आप अपनी पसंद के १० लेखकों को चुन लीजिये.उन लेखकों का एक-एक लेख चुनकर प्रत्येक लेख के बारे में अपने कुछ विचार व्यक्त करने के साथ लिंक जोड़ दीजिये.लिंक जोड़ने के लिए लेख के नीचे दायीं तरफ tell & share में जाकर gmail दबाकर लिंक ले लीजिये.इस प्रतियोगिता में हम केवल अपनी पसंद ही बता सकते हैं.हमारा फैसला कोई आखिरी फैसला नहीं है.आखिरी फैसला जागरण परिवार को करना है,जो प्रतियोगिता का आयोजक है.आप ने केवल भावुकता में बहकर अपनी पसंद बताई है,जिसका इस प्रतियोगिता से कोई लेना देना नहीं है.अपने सादर प्रेम व् शुभकामनाओ सहित.

के द्वारा:

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

आपके जवाब में कुछ भी सोचने वाली बात ही नहीं है बिलकुल आसान है आप खुद बोलते हैं और भूल जाते हैं अभी आपने कहा है के " सच्चा आदमी वही है जो सभी के लिए एक जैसा सोच सके " यानि चोर भी आदमी ही है आतंकवादी भी आदमी ही है नेता भी आदमी ही है नक्सली भी आदमी ही है तो सबके बारे में एक जैसा ही सोचा जाय तो मामला ही ख़तम हो जाएगा फिर किसी के लिए मुर्दाबाद किसी के लिए ज़िंदाबाद ये कैसा एक जैसा सोच हुआ अच्छा और बुरा भी कहते हैं और एक जैसा सोचने के लिए भी कहते हैं क्या बात है उस्ताद . लीजिये मैं कहता हूँ पुरे दुनिया का शांतिवादी ज़िंदाबाद अमनवादी ज़िंदाबाद राष्ट्रवादी ज़िंदाबाद मोहब्बतवादी ज़िंदाबाद इंडियन मुजाहेदीन आतंकवादी मुर्दाबाद दुनिया का हर आतंकवादी मुर्दाबाद मुर्दाबाद मुर्दाबाद . मुजाहिद का मानी आप जानते नहीं मुजाहिद वो होता है जो देश को बचने के लिए जिहाद करे धर्म पर संकट आये तो उसे बचने के लिए जिहाद करे मासूम और बेगुनाहों को बचाने के लिए जिहाद करे देश कि शान और सम्मान पर खतरा आने का खदशा हो तो जिहाद करे उसे कहते हैं मुजाहिद सही मुजाहिद आतंकवादी नहीं होता मुजाहिदे मिल्लत ( इस्लाम के बड़े मौलाना ) ने देश कि आज़ादी के लिए क्या किया इतिहास उठा कर देख लें उनको मुजाहिद कहा गया है . मुझे उमीद है के आप समझ गए होंगे के सच्चाई से दूर कौन है धन्यवाद .

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

आपने जो सवाल पूछा था मुझे ये पता था की ये आपको पता है इसीलिये जबाब नहीं दिया था आज फुर्सत में बैठा था तो लिखे दे रहा हूँ ..........प्रभु ईसामसीह के पिता नाम था जोशेफ था आपने शायद यही सवाल किया था ? जब फुर्सत है तो थोड़ा ज्ञान और बांटा और सुना जाए और इसीलिये थोड़ी बहुत खुजली और किये देता हूँ ............श्री हजरत मुहम्मद साहब के पहले भी 185000 पैगम्बर मुस्लिम समाज में हुए हैं और जो इतिहास कहता हैं उसके अनुसार वो सभी समाज कि बुराइयां दूर नहीं कर पाये और हजरत मुम्मद साहब पहले पैगम्बर थे जिन्होंने मुस्लिमो को अहिंसा के रास्ते पर चलना सिखाया और कुरआन दी जो कि वास्तव में एक अच्छा धार्मिक ग्रन्थ है जिसमें एक अच्छी जीवन शैली के सारे नियम क़ानून बेहद खूबसूरत हैं लेकिन उनकी मौत के तुरंत बाद फिर उसी प्रकार की बर्बर सभ्यता की ओर मुस्लिम समाज झुकता हुआ दिखाई देता है .........इसी क्रम में शिया और सुन्नी का विवाद बेहद चौकाने वाला रहा है ! क्या ये विवाद हजरत मुहम्मद साहब को कबूल होता ? मैंने ये सब आपको किसी प्रकार से दुःख पहुचाने के लिए नहीं लिखा है आपकी भावनाओं का में पूरा आदर करता हूँ लेकिन गलत गलत होता है ! जब आचार नहीं होता तब विचार होते हैं ,जब विचार नहीं होते तब ज्ञान होता है ..........गौर कीजियेगा धन्यवाद

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

धर्म निरपेक्ष और निष्पक्ष एक ही शब्द के पर्याय कि तरह हैं और जैसे कोई सच्चा मुसलमान धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता वैसे ही आप हैं आपके द्वारा निरपेक्ष रूप से लिखीं गयी एक पंक्ति (आप भी वही हैं जो दूसरे है कोंग्रेस के नेता हैं जदयू के नेता हैं बसपा के नेता हैं सपा और अन्य दलों के नेता है आप कैसे उनसे अलग हैं) से आप निरपेक्षता का प्रमाणपत्र चाहते हैं तो किसी समझदार से असम्भव है ! आपने किसी फतवे जारी करने वाले किसी मुल्ला-मौलवी का कोई जिक्र किया होता तो कुछ समझ आता ! मैं आपसे एक उदाहरण द्वारा एक सवाल पूछता हूँ (एक फ़िल्म का उदाहरण दे रहा हूँ - ग़दर फ़िल्म का एक दृस्य है जिसमें हीरो कहता है पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत जिंदाबाद और कहता है कि दोनों देश जिंदाबाद रहें और भारत को मुर्दाबाद कहने से मना कर देता है ) क्या आप ऐसा कर सकते हैं सच्चा आदमी वही है जो सभी के लिए एक जैसा सोच सके आप अभी सचाई से बहुत दूर हैं आपने दिमाग खोल कर वोट डालने कि अपील की ......आपको सच बताऊँ ऐसा शायद पहली बार हो रहा है ! मेरे साथ अगर आप दोहरा सके तो दोहरा के दिखाएँ .............सोनिया गांधी ज़िंदा बाद -नरेंद्र मोदी जिंदाबाद ,बजरंग दल मुर्दाबाद -इंडियन मुजाहिदीन मुर्दाबाद ..........फिर सोचना शुरू करना और लिखना भी !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी,बहुत अच्छा लेख.ये शेर लाजबाब है-आज तक आग से खेलते आये हम क्या खबर थी के पानी से जल जायेंगे.किसी पार्टी से मुझे कोई लेना देना नहीं है,परन्तु मै चाहता हूँ कि एक बार मोदी जी पीएम् बनें,देखा जाये कितना वादा पूरा करते हैं.हालाँकि ये काम भी बहुत मुश्किल है क्योंकि बहुमत जुटाने के लिए ये लोग सहयोग किसका लेंगे?अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि ये लोग बनाये होते तो बात बनती.चलिए भविष्य में देखा जाये अब क्या होता है.नेताओं का कोई भरोसा नहीं कि कुर्सी के लिए कौन किससे समझौता करेगा.आप के पिछले लेखमे एक कविता थी-"एक बड़ा सा फार्म हॉउस बनाने का देहात से निकल कर खुद का एक महल दिल्ली में बनाने का" मुझे बहुत अच्छी लगी थी.नेताओं की सच्चाई बयान करती है.दिन-प्रतिदिन आप निष्पक्ष और बेहतर से बेहतर लिख रहे हैं.लेखक की कोई व्यक्तिगत पसंद होना भी नहीं चाहिए.हाथ में कलम थामे तो निष्पक्ष हो जाये,इससे समाज में उसकी स्वीकार्यता बढ़ती चली जाती है.मेरी और से बधाई और शुभकामनाएं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

कादरी जी मनुष्य सारे ब्रम्हांड (कायनात) का एक क्षुद्र जीव भर है और कुछ नहीं ........और मनुष्य से कमजोर और डरपोक जीव इस दुनिया मैं नहीं है ....उदाहरण के तौर पर अगर सिर्फ बुद्धी ना हो तो एक मनुष्य अपने लिए भोजन का भी प्रबंध नहीं कर सकता ...और इसी डर के कारण मनुष्य ने इकट्ठा रहना शुरू किया जिसे समाज कहा गया लेकिन डर ख़तम नहीं हुआ .....उसने आविष्कार करने शुरू किये अपने को सुरक्षित और बलशाली बनाने के लिए .......अब भी डर ख़तम नहीं हुआ फिर खुदा और भगवान् को बनाया गया .......लेकिन चूँकि हैम एक डर की पैदाईश हैं इसीलिये हम अब भी संतुष्ट नहीं हुए हथियार बनाने लगे और पता किसके लिए ? अपने ही जैसे लोगों के लिए..... उन्हें जीतने के लिए..क्योकि डर अभी ख़तम नहीं हुआ और ना ही होगा क्योकि ये मनुष्य की प्रकृति है .........दुनिया के लाखों ग्रन्थ ,सैकड़ो धर्म ,करोणों देवी ,देवता ,फ़रिश्ते मिल कर भी आज तक नहीं समझा पाये तो मैं क्या समझाऊंगा आप जो है वही हैं और हम जो हैं वही है ......एक कहावत है लेखन मन की विष्ठा (पोट्टी) की तरह है जोर की लगी थी सो लिख दिया .....टेंशन ना ले !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

आप मेरे लेख को शक कि निगाह से मत देखें मैं ने वही कहा जो देखा आप ठीक से पढ़े सब नेताओं का ज़िक्र है और वैसे भी आज तक दो करोड़ का लाल क़िला बना कर किसी ने भासड़ नहीं दिया था और एक हज़ार कि पुलिस का फ़ौज लेकर एक राज्य से दूसरे राज्य में कोई नहीं गया भारत में ओबामा और किलिंग्टन भी नहीं आये थे इतने फ़ौज के साथ अब आप ही बता दें के सबसे ज़यादह खर्च किस पर हो रहा है मैं कुछ नहीं कहूंगा वैसे आतंकवाद कि लड़ाई अब मुस्लिम भी लड़ रहा है अपने औलाद का जुर्म साबित होने पर उसका क्रिया कर्म करने से इंकार कर दिया ये है मुस्लिम और मुस्लिम का धर्म जो भ्रष्टचार के खिलाफ भी जंग करता है आज तक कितने मुस्लिम घोटाले और भ्रष्टचार में आरोपी हैं बता सकते हैं मुसलमान अमन और चैन चाहता है आतंकवाद और भ्रष्टचार इस्लाम नहीं सिखाता जो करते हैं वो नाम के मुस्लिम हैं उनसे मुस्लिम का कोई नाता नहीं .

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

मैं आप से यही कहूंगा के धर्म से ही सब कुछ है धर्म ही सबका हक़ दिलाता है धर्म ही सबका ईमान और अच्छा बुरा में फ़र्क़ बताता है धर्म आप अगर धर्म से ऊपर किसी चीज़ को मानेंगे तो कुछ बचेगा ही नहीं तो किसको मानने का दावा करेंगे मैं ने कहा था के अगर धर्म और देश कि महानता और हक़ीक़त जानना हो तो इस ब्लॉग पर बहस मुमकिन नहीं आप मेरे चैटिंग रूम में आयें या पहले अपने उन सब ग्रन्थ और वेद को पढ़ लें सब कुछ समझ में आ जाएगा के धर्म क्या है और दुनिया क्या है सबको सबका अपना अपना हक़ है बाप जितना भी ख़राब हो बाप ही रहेगा भाई जितना भी अच्छा हो वो भाई रहेगा बाप नहीं बन सकता बीबी जितनी भी अच्छी हो वो बीवी ही रहेगी बहन या माँ नहीं बन सकती मगर हर इंसान समय से बदलता रहता है पहले लड़की फिर बेटी फिर बहन बीवी माँ ये औरत के नाम बदलते रहे मगर ईश्वर कल भी कल ही था आज भी ईश्वर ही है कल भी ईश्वर ही रहेगा इस लिए जिसका जो पद है उसको उसी पद के हिसाब से उसका आदर सम्मान और हक़ अदा कीजिये सब कुछ सिख लेंगे सब कुछ समझ में आ जाएगा . आप मेरे दो सवालो का जवाब ज़रूर देंगे तब आप समझ जायेंगे . धन्यवाद .

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

वंदे मातरम का शाब्दिक अर्थ है ........माँ की वन्दना करना ! कादरी जी आपको भी माँ की वन्दना से आपत्ति नहीं है आपको सिर्फ भारत की वंदना से आपत्ति है !سایۂ خُدائے ذوالجَلال ये क्या लिखा है आपने शायद न सुना हो लेकिन पाकिस्तान के कौमी तराना से ली गयी अंतिम पक्तिया हैं बस यही बन्दे मातरम है ! इस कौमी तराने मैं पाकिस्तान को खुदा के बराबर माना है ! हम तो सिर्फ माँ मानने को कहते हैं तो आपको ऐतराज है ! और एक बात जो आपको समझाने का बहुत मन कर रहा है दुनिया कितनी भी आगे बढ़ गयी हो लेकिन हम पैदा वैसे ही हो रहे हैं जैसे लाखों साल पहले होते थे सिर्फ माँ के पेट से और इस सत्य को कोई धर्म नहीं बदल सकता है ......... दुनिया किसने बनाई हमने नहीं देखा लेकिन कोई अल्लाह ,कोई भगवान् ,कोई गॉड बिना माँ के बच्चे पैदा करके दिखाए मैं उसी धर्म को अपना लूंगा हम धर्म बदल सकते हैं माँ नहीं .......! मेरी कोई बात बुरी लगी हो तो माफ़ करना लेकिन अगर जबाब अच्छा लगे तो तारीफ़ जरूर करना और अगर कोई और जबाब चाहिए हो तो मुझे भी याद करना !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

बड़ी अच्छी बात है कि आपने मेरे प्रश्नो के जबाब में एक लेख लिख डाला/ मैं धर्म और दर्शन का ज्यादा जानकार नहीं हूँ लेकिन इतना तो जानता हूँ कि मुझे भगवान और माँ में से किसी एक कि वन्दना करने को कहा जाय तो मैं माँ की वन्दना करना चाहूँगा / और यदि माँ और वतन में से किसी एक की वन्दना करना हो तो मैं गर्व से वतन को चुनुँगा / यही भारतीय धर्म है / विदेशों से आयातित धर्मों ने भले ही हमें वतन और अपनी माँ से ज्यादा अपने धर्म को तरजीह देने कि वकालत की हो लेकिन हमें शिक्षा मिली है -"जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" अर्थात जननी जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान है / हालांकि आपने लिखा है की दुनिया तालीम में बहुत आगे बढ़ गई है लेकिन लगता है कुछ लोगों की सोच में वही रूढ़िवादिता आज भी वही की वही है / जिस दिन इस देश का मुसलमान अपने धर्म से ऊपर इस देश को मानने लगेगा उसी दिन इस पावन भूमि पर उनके लिए जन्नत उतर आयेगा / भगवान् है या नहीं है इस पर विवाद हो सकता है लेकिन माँ और वतन रूपी भगवान इस धरती पर मौजूद है इससे कोई इंकार नहीं कर सकता / अतः माँ और वतन वन्दना, सेवा और प्यार सबकी हकदार है / आइये हम सब मिलकर "भला हो जिसमे देश का वो काम सब किया करे" / जितना महत्व कब्र में बैठे मृतात्मा के जियारत का है उससे कम माँ और वतन के जियारत का नहीं है / आइये हम सब मिलकर कहे " भारत माता की जय"

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

बहुत बहुत शुक्रिया आपसे गुज़ारिश है के आप ठीक से पढ़ें शुरू कहाँ से हुआ है और मैं ने एक तरफ़ा कोई बात नहीं कि जो गुनहगार है उसको सजा ज़रूर मिले मगर खबर भी देखें आतंकवादी होने पर माँ बाप ने नाता तोड़ दिया इतने दिन से बिहार यु पि सकून से था मोदी के आते ही ये माहौल ख़राब क्यों हुआ जहाँ गुजरात का बैग भी मिला उसका किया हुआ अजमेर ब्लास्ट में जिन लोगों का नाम आया उनका किया हुआ आज गुजरात के कितने दंगाईओं पर केस चल रहा है यही बात आपसे पूछूं तो किया कहेंगे के मोदी या आपको एक का ही दर्द क्यों नज़र आता है मुस्लिम सबके दर्द को बाँट लेता है ठीक से सर्वे करें आपको पता लगेगा हर दंगे में किसकी कितनी जान जाती है कौन कितना सब्र करता है ठीक से देखें धन्यवाद .

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

कश्मीर घाटी में हिन्दुओ का कत्लेआम / सिख्खों का कत्लेआम / गोआ में चर्चों द्वारा किया गया कत्लेआम / खून तो सभी धर्मों के लोगों का बहता हैं / लेकिन दर्द केवल एक खास धर्म के लोगों का खून बहने पर ही क्यों होता है / आइये हम सब मिलकर कश्मीर घाटी के बचे-खुचे, शरणार्थी बने हिंदुओं को पुनर्वासित करने के लिए आवाज़ बुलंद करे / फिर से धर्म के आधार पर खंडित किये गए भारत माँ को एक करने के लिए आवाज़ बुलंद करें / ज़रा एक प्रश्न का जबाब दीजियेगा मोदी बिहार में चुनाव प्रचार करने गए थे / क्या उन्होंने कोई गुनाह किया था / कुछ युवकों ने उनके सभा के दिन सीरियल ब्लास्ट कराएं / क्या उन्होंने गुनाह नहीं किया था / क्या उनके गुनाह को मुसलमान होने के नाते नजरअंदाज़ किया जाना चाहिए / क्या उनलोगों ने सांप्रदायिक तनाव फैलाने का प्रयास नहीं किया /

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

के द्वारा:

के द्वारा: deepakbijnory deepakbijnory

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: Raj Bahadur Raj Bahadur

मैं अपील करूँगा उन देश वासियों से के इस बार अपने मत का सही पर्योग करें एक वक़्त की रोटी एक बोतल शराब चंद रोज़ की रोटी या वक्ती आराम के लिए अपने वोट का गलत इस्तेमाल नहीं करें इस से देश का संतुलन बिगड़ सकता है आज़ादी छीन सकती है हम दोबारा गुलाम हो सकते हैं अगर ऐसा हमने नहीं सोचा तो फिर हमें कोई हक नहीं के कल रोड पर निकल कर इन्ही को गली दें जिन्हें हमने ही भेजा है ये हमारी ही गलती है किसी और की नहीं क्युनके इन्हें हम ही ये पावर देते हैं फिर इनके गुलाम बनते हैं ! मुदस्सर साब , आप एक भाररतीय के नाते बहुत अच्छा सोचते हैं , मुबारकवाद ! लेकिन मैं , याद रखें मैं किसी पार्टी से जुदा हुआ नहीं हूँ , मैं आपको विश्वास दिला सकता हूँ की आज के कठिन समय में एक मात्र नरेन्द्र मोदी ही वो शख्स है जो देश को आगे ले जा सकता है , एकता बनाये रख सकता है , विकास कर सकता और भ्रष्टाचार पर कुछ अंकुश लगा सकता है !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

अब समय आ गया है के हमारा नेता हमारा मुखिया हमारा रहबर कैसा हो जिसे देश का वो वासी जो जंगलों दरयाओं के किनारे पानी की लहरों से खेलता हुआ अपनी जान को बचाता है टूटी फूटी झोंपड़ियों में ज़िन्दगी बसर करता है जो मिल गया खा लिया नहीं मिला तो भगवान् भरोसे सो गया उसने आज तक ऐसे मुखिया को देखा नहीं सुना नहीं या जो देश को तोड़ने आपस में लड़ाने अपनी रोटी सकने अपने मुंह मियां मिठू बन्ने की फिकर में हो देश का भला सिर्फ उसके ज़बान पर हो दिल में कुछ और हो जिसकी हकीक़त सभी जानते हों मगर अंध विश्वास अंधी मोहब्बत झूठी शान के लिए मर रहा हो हम ऐसे को अपना मुखिया चुनेगें या जिसकी हर सीरत हमारे सामने हो जो हमारी मोहब्बत और एकता को कायेम रख सके हमें अलग अलग लाईन में खड़ा न करे हमारे बिच भेद भाव नहीं आने दे हर पल हमारी हिफाज़त और एकता की फिकर रखे वो हमारा मुखिया हो आज अगर हम फिर एक मत नहीं हुए एक दुसरे के दर्द को जान नहीं सके नफरत और बगावत की आंधी को नहीं रोक सके उन नेताओं को अपने समाज से नहीं फेंका जो सिर्फ हमें धर्म ज़ात पात या राम या रहीम के नाम पर बांटने की कोशिश करते हैं अपनी रोटी को किसी तरह सेंकना चाहते चाहे वो किसी भी इन्सान के जिस्म से निकली हुई चर्बी या खून क्यूँ न हो .सटीक

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

के द्वारा: Mudassar Imam Mudassar Imam

के द्वारा: ushataneja ushataneja

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

मुझे खेद है है कि मैं कटु शब्द प्रयोग कर रहा हूँ किन्तु जब ऐसी दक़ियानूसी मानसिकता को व्यक्ति यूं बेपर्दा होकर जाहिर करे तो कटु शब्दों को पर्दे से बाहर निकलना ही पड़ता है.! शर्म आती है उस सोच पर कि आप यूं खुले आम कहने मे शर्म नहीं खाते कि औरत का मतलब है परदे में रखना, जिस तरह के हम दौलत को बैंक में रखते हैं.... औरत किसकी दौलत है, ये हक किसने दिया कि आप उसे अपनी दौलत समझें?? कागज के नोटों और एक जीती जागती जिंदगी में आपको कोई फर्क ही नजर नहीं आता? बात शालीनता तक तो समझ में आती है लेकिन औरत को मालिक ने पर्दे के लिए ही बनाया है, उसका एक एक अंग छुपाने के लिए है जैसी बातें दिवालियेपन के अतिरिक्त कुछ और नहीं है... भले ही ये दिवालियापन सदियों पहले डाला गया हो किन्तु वो इंसानियत नहीं बन जाता! जिस मालिक ने औरत को माल और पर्दे की चीज बनाया वो इस दुनिया में कहीं नहीं है, ये किसी शैतान की करतूत है.... जरूरत है आप खुद दक़ियानूसी के पर्दे से बाहर आयें न कि औरत को पर्दे में रखने की वकालत करें.!!!

के द्वारा: vasudev tripathi vasudev tripathi




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